ARABhojpur

आरा कोर्ट बम ब्लास्ट कांड में चार साल छह महीने बाद आया फैसला…

आरा : सूबे के बहुचर्चित आरा सिविल कोर्ट बम ब्लास्ट कांड में करीब चार साल, छह महीने बाद शनिवार को अदालत का फैसला आ गया। इस मामले में कुख्यात लंबू शर्मा, अखिलेश उपाध्याय, रिकू यादव, चांद मियां, नईम मियां, अंशु कुमार, प्रमोद सिंह व श्याम विनय शर्मा समेत आठ आरोपियों को साजिश रचने, बम विस्फोट करने, हत्या करने तथा कस्टडी से फरार होने एवं उसमें सहयोग करने का दोषी पाया गया है। इस कांड में अभियुक्त बनाए गए पूर्व विधायक सुनील पांडेय, संजय सोनार, विजय शर्मा सहित तीन लोगों को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में संदेह के आधार पर रिहा कर दिया गया है। इस दौरान कस्टडी में लिए जाने के डर से दोषी पाया गया एक अभियुक्त चांद मियां फरार हो गया।

मालूम हो कि इस मामले में 29 जुलाई, 2016 को तरारी के पूर्व विधायक नरेन्द्र कुमार पांडेय उर्फ सुनील पांडेय सहित 11 के खिलाफ आरोप गठित किया गया था। सभी आरोपितों के खिलाफ आरोप का गठन उस समय प्रथम अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा किया गया था। आरोप गठन के समय पूर्व विधायक सहित सभी आरोपित कोर्ट में थे। आरोपितों ने अपने ऊपर लगाए गए आरोप से इंकार किया था।

कोर्ट में पूर्व विधायक नरेन्द्र कुमार पांडेय उर्फ सुनील पांडेय, चांद मियां, प्रमोद सिंह, श्याम विनय शर्मा, लंबू शर्मा उर्फ मुन्ना शर्मा, अंशु कुमार, अखिलेश उपाध्याय, रिकू यादव, विजय शर्मा, मो. नईम व संजय सोनार के खिलाफ भारतीय दंड विधान की विभिन्न धाराओं व एक्सप्लोसिव सब्सटांस एक्ट के तहत आरोप का गठन किया गया था। उस समय भागलपुर व आरा जेल में बंद इन आरोपितों को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच आरा सिविल कोर्ट में आरोप के गठन के लिए प्रस्तुत किया गया था। इस दौरान पूरा कोर्ट परिसर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया था।

जिस समय आरोप का गठन हुआ था उस समय पूर्व विधायक नरेन्द्र कुमार पांडेय उर्फ सुनील पांडेय व चांद मियां इस मामले में बेल पर थे। जबकि आरोपी प्रमोद सिंह, श्याम विनय शर्मा, लंबू शर्मा उर्फ मुन्ना शर्मा, अंशु कुमार, अखिलेश यादव व रिकू यादव और आरा जेल में विजय शर्मा, मो. नईम व संजय सोनार भागलपुर जेल में बंद थे।

आपको बताते चलें कि 23 जनवरी, 2015 को आरा सिविल कोर्ट परिसर में बम ब्लास्ट हुआ था। घटना में बम लाने वाली नगीना देवी व एक सिपाही अमित कुमार की मौत हो गई थी, जबकि एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए थे। बम ब्लास्ट के दौरान आरा जेल से सिविल कोर्ट में पेशी के लिए लाए गए लंबू शर्मा व अखिलेश उपाध्याय फरार हो गया था, जिन्हें बाद में पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

दोषी पाए जाने की भनक लगते हीं कोर्ट से हो गया फरार…

कोर्ट बम ब्लास्ट कांड में दोषी पाए जाने के बाद कुख्यात चांद मियां की मुश्किलें बढ़ गई है। इस कांड में कोर्ट ने चांद मियां के अलावा उसके भाई नईम मियां दोनों को दोषी पाया गया है। शनिवार को कोर्ट में सुनवाई की तारीख को लेकर वह हाजिरी लगाने आया था, लेकिन, सजा पर फैसला के समय वह कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ। अदालत ने फरार चांद मियां का बेल बांड रद्द करते हुए गिरफ्तारी और कुर्की का आदेश जारी किया है। अदालत ने भोजपुर एसपी को किसी भी परिस्थिति में फरार चांद को गिरफ्तार कर अदालत ने प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

इस घटना के साजिश में कुख्यात चांद मियां का नाम आया था। जिसके बाद पुलिस ने 17 मई वर्ष 2015 को वांटेड चांद मियां को दिल्ली से गिरफ्तार कर आरा लाई थी। बाद में उसे सभी कांडों में कोर्ट से जमानत मिल गई थी। चांद मियां अपराध की दुनिया में वर्ष 2008 से हीं सक्रिय रहा है। उसके विरूद्ध हत्या, रंगदारी व बम ब्लास्ट समेत दो दर्जन केस दर्ज है। इसके अलावा उस समय आठ जून 2014 को टाउन थाना अन्तर्गत धरहरा स्थित इम्तेयाज अनवर के घर पर दहशत फैलाने के उद्देश्य से फायरिग करने और 13 सितम्बर 2014 को गल्ला व्यवसायी मिटू साह की गोली मारकर हत्या किये जाने के मामले में भी चांद मियां आरोपित रहा है।

दो जुलाई 2017 को पड़ाव चौक पर घटित गोला व्यवसायी हत्याकांड में भी कुख्यात चांद मियां जेल गया था। टाउन थाना के धरहरा निवासी हिस्ट्रीशीटर चांद मियां पर गोला व्यवसायी की हत्या करने का षडयंत्र रचने का आरोप था। इस केस में उसने 11 जुलाई 2017 को सरेंडर किया था।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

×

बिहार की खबरों से रहे अपडेट

Close