Big NewsBreaking NewsPatnaPolitics

BIG BREAKING ! 2018 में बिहार की राजनीति: कहीं दुश्मन बने दोस्त, तो कहीं पलभर में छूटा सालों का साथ…

2018 को राजनीतिक गलबहियों के लिए खूब याद किया जाएगा...

साल 2018 बिहार की राजनीति में कई दिलचस्प घटनाक्रमों के लिए याद किया जाएगा. सियासत की इस बिसात पर कई मोहरों ने पाला बदला, तो कई कमजोर और ताकतवर हुए. राजनीति के बनते-बिगड़ते समीकरण के बीच कहीं दुश्मन भी दोस्त बनकर गले मिले, तो कहीं सालों का साथ पलभर में छूट गया.

बिहार एनडीए के लिए यह साल मिलाजुला रहा. जहां एक ओर 2017 के अंत में सरकार बनाने के बाद साल भर सरकार चलती रही, तो वहीं साल के शुरू में मांझी ने और अंत में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए का साथ छोड़ दिया. एनडीए में पांच साल रहे कुशवाहा ने न सिर्फ गठबंधन छोड़ दिया बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से भी इस्तीफा दे दिया और महागठबंधन का दामन थाम लिया.

वैसे तो नीतीश कुमार ने महागठबंधन का साथ छोड़कर 2017 में ही बीजेपी के साथ नई सरकार बना ली थी, लेकिन इसका इफेक्ट 2018 में देखने को मिला. जब एनडीए में शामिल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार से नाराज होकर बीच मझधार में ही एनडीए का पतवार छोड़ दिया और राजद-कांग्रेस के विरोधी गठबंधन में शामिल हो गए. एनडीए में शामिल लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष रामविलास पासवान के बेटे और लोजपा संसदीय बोर्ड के चेयरमैन चिराग पासवान ने अपने ट्वीट और चिट्ठी से बीजेपी में हलचल मचा दी. कुशवाहा के बाहर निकलने के बाद चिराग ने नरेंद्र मोदी सरकार से नोटबंदी के फायदे पूछकर दबाव बनाया और सीट शेयरिंग में मनमुताबिक सीट का वादा ले लिया. इधर, अमित शाह के करीबी माने जाने वाले ‘सन ऑफ मल्लाह’ के नाम से मशहूर मुकेश सहनी भी महागठबंधन में शामिल हो गए.

इधर, कई महीनों के इंतजार के बाद कांग्रेस को बिहार प्रदेश में नया अध्यक्ष मिला. काफी गहमागहमी के बाद कांग्रेस ने सवर्ण मदन मोहन झा के प्रदेश कांग्रेस की जिम्मेदारी सौंपी. देशभर में सवर्णों के बीजेपी के खिलाफ नाराजगी को भुनाने के लिए कांग्रेस ने एक अध्यक्ष के साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए. कांग्रेस का बिहार में सालों का आरजेडी का साथ बना रहा और 2019 में भी लोकसभा चुनाव साथ लड़ने की घोषणा की है. 2018 में सत्ता से बाहर रहने के बावजूद बिहार का सबसे बड़ा सियासी घराना लालू यादव का परिवार भी खूब सुर्खियों में रहा. इस साल आरजेडी सुप्रीमो ने अपने बड़े बेटे की शादी की. इस शादी में कुछ ही दिन पहले ही महागठबंधन से नाता तोड़कर एनडीए के साथ गए नीतीश कुमार भी शामिल हुए. खूब रौनक रही, लेकिन कुछ ही महीनों बाद तेजप्रताप यादव ने कोर्ट में अपनी पत्नी से तलाक की अर्जी देकर सबको चौंका दिया.

लालू यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव भी इस साल खूब चर्चा में रहे. पिता लालू यादव के चारा घोटाला मामले में जेल जाने और सत्ता से बाहर होने के बाद उन्होंने पार्टी को बखूबी संभाला. तेजस्वी ने सीएम नीतीश कुमार के काम को लेकर उनपर जमकर हमले किए. सूबे में कई दिनों की यात्रा कर उन्होंने खूब लोकप्रियता बटोरी, तो वहीं रेलवे टेंडर घोटाला मामले में एक और केस ने लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ा दी.

बीजेपी की बात करें तो बिहार से उनके दो सांसद सालों भर अपनी ही पार्टी के खिलाफ खुलकर बगावत करते नजर आए. दरभंगा से सांसद कीर्ति आजाद को तो बीजेपी पहले ही निलंबित कर चुकी थी, लेकिन पटना साहिब के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पाई. बीजेपी इस बार लोकसभा चुनाव में इन दोनों को टिकट नहीं देगी ये तो तय माना जा रहा है, इसीलिए दोनों नेता कांग्रेस और आरजेडी से टिकट पाने की आस लगाए बैठे हैं.

2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की जीत में अहम योगदान निभाने वाले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को नीतीश कुमार ने इस साल अपने पाले में मिला लिया और उन्हें अपने बाद पार्टी में दूसरी नंबर की हैसियत दी. हालांकि पटना विश्वविद्यालय के छात्र संघ चुनाव में जेडीयू पर सीधे तौर पर शामिल होने के आरोप लगे, जिससे प्रशांत किशोर की किरकिरी भी हुई, लेकिन अध्यक्ष पद की कुर्सी जेडीयू को ही मिली.

बिहार में सालभर सियासी उलटफेर ने देशभर में खूब सुर्खियां बटोरी. 2018 को राजनीतिक गलबहियों के लिए खूब याद किया जाएगा. इसमें कई दोस्त दुश्मन बने तो कईयों ने पुरानी रंजिश भुलाकर सत्ता के लिए साथ चलने का वायदा किया. बहरहाल, अब सबकी नजर अगले साल पर है कि 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के और कितने रंग देखने को मिलेंगे.

न्यूज़ बिहार से अभिषेक की रिपोर्ट .

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

×

बिहार की खबरों से रहे अपडेट

Close