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शिक्षा विभाग आयकर विभाग को लगा रहा लाखों का चूना, जानिए पूरा मामला…

इनकम टैक्स विभाग की ओर से आदेश दिए जाने के बाद भी नियोजित शिक्षकों की टीडीएस कटौती नहीं हो रही...

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, शिक्षा विभाग इनकम टैक्स विभाग को चूना लगा रहा है। 13 हजार से अधिक नियोजित शिक्षकों की टीडीएस कटौती नहीं हो रही है। कई बार इनकम टैक्स विभाग की ओर से आदेश दिए जाने के बाद भी कटौती नहीं हो रही है। प्राथमिक, मध्य, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूल के शिक्षकों का वेतन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना के माध्यम से होता है। शिक्षा विभाग के अधिकारी टीडीएस कटौती मामले में मौन धारण किए हुए हैं।

3 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में 13 हजार से अधिक नियोजित शिक्षक कार्यरत है। इनका टीडीएस कटौती नहीं होने से इनकम टैक्स विभाग को नुकसान हो रहा हैं। इसमें से कई शिक्षक टैक्स के दायरे में आ चुके हैं। ढ़ाई लाख रुपये वार्षिक आय होने के बाद संबंधित व्यक्ति को आयकर रिटर्न भरना पड़ता है।

इनकम टैक्स की टीम पिछले दिनों जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंची थी। टीम के सदस्य ने आवश्यक कागजात की मांग की, लेकिन उपलब्ध नहीं कराया जा सका। ऐसे में कार्यालय के लिपिक को कागजात के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया था। टीम ने टीडीएस कटौती नहीं किए जाने पर आपत्ति जताई थी।

आय स्त्रोतों पर कर कटौती या टीडीएस एक प्रकार का कर होता है जो किसी व्यक्ति से सामयिक और असामयिक आधार पर वसूला जाता है। टीडीएस नियमित रूप से आय के लिए लागू होता है। किसी व्यक्ति को भुगतान करने से पहले उसकी आय से एक निश्चित राशि को काट ली जाती है। इसके लिए बाकायदा वित्तीय वर्ष के अंत में 16 ए फॉर्म दिया जाता है। टीडीएस को सैलरी, कमीशन, प्रोफेशनल फीस, ब्याज, किराए आदि पर काटा जाता है। टीडीएस कैलकुलेशन वेतन, ब्याज भुगतान, कमीशन, वकीलों की फीस आदि के लिए भुगतान टीडीएस के अधीन हैं। वेतन के लिए टीडीएस का प्रतिशत व आय के स्लैब दरों पर आधारित होगा।

न्यूज़ बिहार से अभिषेक की रिपोर्ट .

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