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देवोत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा…..

मधुबनी | पर्व-त्योहारों की अप्रतिम, अलौकिक व अनुपम परंपरा ही मिथिलांचल की पहचान रही है। कुछ पर्व का जुड़ाव जहां आध्यात्म से है वहीं कुछ का सांस्कृतिक विरासत से। इसी कड़ी में देवोत्थान एकादशी पर्व का अपना अलग महत्व है। देवोत्थान एकादशी पर्व शुक्रवार को मधेपुर एवं लखनौर प्रखंड सहित जिले में श्रद्घापूूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं व पुरुषों ने दिनभर उपवास रखा। संध्याकाल महिलाओं ने आंगन में अष्टदल अरिपन बनाया। इन अरिपनों पर पीढ़ी रखकर उसे अरवा चावल के पीसे हुए पवित्र पिठाड़ से सुसज्जित किया गया। साथ ही घर के आंगन में भगवान के चरणों की आकृति बनाया गया। ये विश्वास किया जाता है कि भगवान इसी रास्ते आएंगे। इसके बाद लोगों ने भगवान विष्णु सहित अन्य देवी-देवताओं की पूजा श्रद्घापूर्वक की। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन भगवान विष्णु का जागरण होता है। शाम में व्रती महिलाओं ने आस-पड़ोस के आंगन में जाकर बनाये गये अरिपन को देखा। इस पुनीत मौके पर लोगों ने घर के प्रवेश द्वारों रंग-बिरंगे रोशनी से सजाया। साथ ही श्रद्घालुओं ने मंदिरों में पूजा-अर्चना कर आस्था निवेदित की। अरवा चावल का पिठाड़(लेप) घर के आलमीरा, बाइक, टेलीविजन, रेडियो सहित अन्य सामान पर लगाया गया। कहा जाता है कि आज के दिन पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और भक्तों को मनोवांछित फल देते हैं। मिथिला के आंगन का अष्टदल अरिपन देखते ही बनता था ||

NBL Madhubani

"है जो जमीर जालिम उसे बेनकाब कर दे,ये खामोशी तोड़ दे तू इंकलाब कर दे"

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