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नीतीश सरकार में शिक्षा व्यवस्था चौपट – गोलू यादव

औरंगाबाद में जन अधिकार छात्र परिषद के निवर्तमान प्रदेश महासचिव सह मगध प्रमण्डल प्रभारी विजय कुमार उर्फ गोलू यादव

औरंगाबाद में जन अधिकार छात्र परिषद के निवर्तमान प्रदेश महासचिव सह मगध प्रमण्डल प्रभारी विजय कुमार उर्फ गोलू यादव ने प्रेस ब्यान जारी कर कहा कि मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार की सरकार बिहार में शिक्षा और स्वास्थ्य पर अत्यंत उदासीन रही है. प्रदेश में चारों ओर शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई है. हाल में मुजफ्फरपुर में आई चमकी बुखार ने तो प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था की कमियां और सरकार की विफलता पूरी तरह से उजागर कर दिया है.दिल्ली बिहार की अपेक्षा छोटा प्रदेश है. दिल्ली में श्री अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य किया है. वर्ष 2019-20 में दिल्ली सरकार ने कुल 60,000 करोड़ के बजट में शिक्षा पर जहाँ 16,680 करोड़ (27.80%) खर्च किया है वहीँ स्वास्थ्य पर 8280 करोड़ (13.80%) खर्च किया है.
वहीँ वित्त वर्ष 2019-20 में बिहार सरकार का कुल बजट 200501.01 करोड़ था जो कि दिल्ली के बजट से कई गुणा अधिक है. परंतु बिहार सरकार ने इस दौरान जहाँ शिक्षा पर मात्र 34779 करोड़ (17.36%) खर्च किया वहीँ स्वास्थ्य पर मात्र 9622.76 करोड़ (4.80%) खर्च किया. इससे पहले वित्त वर्ष 2018-19 में बिहार सरकार ने शिक्षा पर 18.15% खर्च किया था वहीँ स्वास्थ्य पर मात्र 4.40%. इस तरह बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 की तुलना में वित्त वर्ष 2019-20 में शिक्षा बजट घटा दिया.जिस राज्य में पिछले 10 सालों से चमकी बुखार से लगातार सैकड़ों बच्चे मर रहे हैं उस राज्य की सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर बजट का मात्र 4.80% खर्च करना सरकार की असंवेदनशीलता और नाकामी को साफ़-साफ़ दर्शाता है. साथ ही नागरिकों के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक शिक्षा का बजट इतना कम रखना और बढ़ते साल के साथ इसमें कटौती सरकार के विकास के विरुद्ध इरादों को उजागर करती है।

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