Aurangabad

औरंगाबाद जेल में कैदियों के साथ हो रहा पशुओं वाली व्यवहार – श्याम सुंदर

औरंगाबाद : औरंगाबाद जिला जेल सुधार गृह नहीं, यातना गृह है।165 बंदियों की क्षमता वाले जेल में करीब सात सौ बंदियों को जानवरों की तरह ठूंस-ठूंसकर रखा जाना। जातीय आधार पर बंदियों/कैदियों के साथ व्यवहार करना। जेल मैन्युअल के तहत भोजन, चिकित्सा आदि की मांग करने पर आर्थिक रुप से कमजोर कैदियों को प्रताड़ित करना। सोने के लिये प्रति महीने दो से तीन हजार रुपये कैदियों से वसूली किया जा रहा है। आवाज उठाने वाले बंदियों को सेल व दूसरे जेल में भेजने की धमकी देना आम बात है। ताजातरीन मामला सजायाफ्ता कैदी अवधेश यादव से जुड़ा है। पिछले दो वर्षों से अवधेश यादव बीमार हैं। खांसने पर मुंह से खून आ रहा है

। इन्होंने इलाज करवाने की बात की तो जेलर ने धौंस दिखाते हुए एक वार्ड से दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया। जेल में फैले अव्यवस्था के खिलाफ मुख्यमंत्री समेत अन्य अधिकारियों को अवगत कराने का प्रयास किया तो अवधेश यादव को कहा जा रहा है कि जेल में तड़पा-तड़पाकर मार देंगे, लेकिन तुम्हारा आवेदन बाहर नहीं जाएगा। थक-हारकर अवधेश यादव पिछले चार दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। पहले से ही बीमार अवधेश यादव मरनासन्न स्थिति में हैं और कोई सुनने वाला नहीं है। बीमारी और शारीरिक-मानसिक प्रताड़ना की वजह से कभी भी इनकी मौत हो सकती है।

औरंगाबाद जिला जेल में कैदियों के हालात के बाबत बुधवार को एक प्रतिनिधिमंडल जेल आईजी से मिलेगा। इसके पहले भी विभिन्न मांगों को लेकर बंदियों ने लंबा भूख हड़ताल किया था।

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