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तेरह वर्षों में 30 लाख घटी नप की आमदनी….

मधुबनी | आबादी और संसाधन में तेजी से वृद्धि हुई है इसके बाद भी नगर परिषद मधुबनी की आमदनी बढ़ने की बजाए घट ही गयी है। वर्ष 2006 में इसकी आमदनी औसतन 80 लाख थी वह अब घटकर महज 55 लाख हो गयी है। जो नगर परिषद में टैक्स संधारण और वसूली में व्याप्त बड़ी अनियमितता की पोल खोल रहा है। इन 13 सालों में शहर में चार हजार से अधिक घर बने हैं। पुराने हजारों घर अपग्रेड हुए हैं। चार हजार से अधिक कॉमर्शियल कमरे व भवनों का इजाफा हुआ है। इसके अलावा छोटे-बड़े होटल, मॉल, विवाह भवन, रेस्टोरेंट, कार्यालय बने हैं। आवासीय घरों में से भी 60 फीसदी घर किराये पर लगाये गये हैं। यानि उसका व्यावसायिक इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद भी आमदनी का घटना से यह उजागर होता है कि यहां टैक्स का बड़ा खेल हो रहा है। लगातार इसकी शिकायत मिल रही है कि जिस भवन का टैक्स 10 हजार होना चाहिए वहां से कर्मी व अधिकारी मैनेज होकर महज हजार-दो हजार में टैक्सेशन का काम कर रहे हैं। जिससे बड़े पैमाने पर नप के राजस्व की क्षति हो रही है। यह खेल बड़े पैमाने पर मापी में भी हो रहा है। शहर में कई मंजिल वाले मकान बन गये हैं। लेकिन उन लोगों से नये टैक्स न लेकर उन्हें धमकी देकर कुछ लेन देन कर लेने का आरोप लगाया जा रहा है। बहुमंजिले इमारतों से या तो टैक्स नहीं ली जा रही है। फिर वाजिब टैक्स की राशि नहीं ली जा रही है। इस बाबत प्रभारी सह प्रधान सहायक शंकर झा ने बताया कि नप में टैक्स बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण नर्णिय लिये गये हैं। आंतरिक संसाधनों को बढ़ाकर शहर को बेहतर बनाने का लक्ष्य नर्धिारित किया गया है। कर्मियों की टीम का गठन किया गया है ||

NBL Madhubani

"है जो जमीर जालिम उसे बेनकाब कर दे,ये खामोशी तोड़ दे तू इंकलाब कर दे"

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