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नीतीश के खिलाफ बन गया माहौल, जल्दी होगी छुट्टी!

बिहार में नीतीश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से चौपट कर दिया है। आप इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं की मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में किस तरह के बच्चों को टॉपर लिस्ट में डालने की गलती करता रहा है बिहार बोर्ड। ये सब उस सरकार के समय मे हो रहा जो खुद के सुशासन का दम भरते हैं। शिक्षा का नियोजन और नियोजित शिक्षक के दम पर पूरी शिक्षा व्यवस्था चौपट हो चुकी है। सरकारी स्कूलों में छात्रों के स्थान पर कुछ नियोजित शिक्षक, स्कूल का नन टीचिंग स्टाफ,खिंचड़ी बनाने वाले बरामदे या मैदान पर गप्पे लड़ाते मिल जाएंगे। चर्चा का विषय होगा कितने महीने से वेतन नहीं मिला आगे किस तरह आंदोलन करना है। सरकार को कैसे रास्ते पर लाना है। इसके साथ ही उच्च शिक्षा का तो और भी बुरा हाल है। समय पर सत्र नहीं चल रहे। परीक्षा के पहले कोर्स पूरी नहीं हो पाता है। ऐसे में बिहार की बदहाल शिक्षा नासूर बनता जा रहा है। कभी दुनिया को शिक्षा देने का प्रमाणिक नाम बिहार आज बदनामी झेल रहा है। उक्त बातें RLSP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ० संतोष कुमार ने भारत लाइव से बातचीत के दौरान कही।

 

डॉ० संतोष का कहना है कि RLSP अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने लगातार इस विषय पर सवाल खड़े किए हैं पर नीतीश सरकार को कोई फर्क नहीं पड़ता पढ़े या अनपढ़ रहे बिहार गद्दी पर चिपके रहें नीतीश कुमार। डॉ० संतोष ने कहा कि शिक्षा को बिहार में सियासी नज़र लग गई है। खिचड़ी के नाम पर पोशाक और साईकिल के नाम पर अपनी छवि चमकाने वाले नीतीश कुमार के राज में कॉपी, किताब, पढ़ाई में गुणवत्ता का कोई महत्व नहीं है। जब जब चुनाव आता है एक नया सगुफ़ा छोड़ देते हैं। वो नारा सिर्फ नारा बन कर रह गया है जिसके दम पर सता में आये थे, पढ़ेगा बिहार तभी बढ़ेगा बिहार पर इस नारे की हकीकत बड़ी विभत्स रूप लेता जा रहा है।

 

एक बार फिर चुनावी माहौल शुरू हो गया है साथ ही शुरू हो गया है सरकार का बेरोजगारों को लोकलुभावने वादों की गो’ली चूसने का दौर। आख़िरकार फिर से शिक्षक नियोजन का ऐलान नीतीश सरकार की तरफ से किया गया है. डॉ० संतोष का कहना है आपको जब कभी गांव जाने का मौका मिले तो वहां युवाओं से जरूर बात कीजियेगा। कितने कष्ट में है हमारे बिहार का युवा। येन केन प्रकारेण किसी भी तरह दुख दर्द और मजबूरी को पछाड़ पढ़ाई लिखाई तो पूरा कर लिया। योग्यता का भी कोई अभाव नहीं, फिर भी बेरोजगार है। अब आपको बता दें कि बिहार में आईएएस, आईपीएएस और अन्य प्रतियोगिता में आप बिहार के युवाओं का कौशल देख सकते हैं। पर सभी आईएएस या उस तरह की प्रतियोगिता में सफल नहीं हो सकते। सरकार ने नौकरी के नाम पर बिहार के अभ्यर्थियों का यू कहें तो युवाओं को चक्करघिन्नी बना दिया है।

यह उन लाखों बेरोजगार युवाओं का यही हाल है जो बिहार सरकार द्वारा राज्य के प्रारंभिक विद्यालयों में करीब एक लाख पदों पर निकाली गई शिक्षकों नियोजन की प्रक्रिया का हिस्सा हैं।

 

डॉ० संतोष ने कहा कि शिक्षा और शिक्षकों की स्थिति सुधारने गुणवता  बहाल करने के स्थान पर नीतीश सरकार ने चुनाव को देखते हुए यह फैसला लिया है। आठ माह बाद विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं तब तक इस प्रक्रिया को जारी रखा जाएगा और लोगों को फंसा कर युवा बेरोजगारों को बहलाया जाएगा। डॉ० संतोष ने इसके तहत पूरी की गई प्रक्रिया को जारी रखा जाएगा। राज्य के सभी पंचायत (कक्षा एक से पांच), प्रखंड (कक्षा छह से आठ), नगर निगम और नगर परिषदों को नियोजन इकाई बनाया गया है! पूरे राज्य में लगभग नौ हज़ार नियोजन इकाइयां हैं और कोई भी अभ्यर्थी किसी भी नियोजन इकाई पर आवेदन कर सकता है। अगर कोई अभ्यर्थी चाहे हो तो एक साथ राज्य के सभी नियोजित इकाइयों में अलग अलग आवेदन कर सकता है। सरकार ने कोई बंदिश नहीं लगाई है इससे सरकार के खाते में और कुछ हो या न हो खजाने में राशि तो जरूर आएगी। नौकरी के लिए परेशान युवा अभ्यर्थी एक साथ कई-कई जगहों पर आवेदन कर रहे हैं। डिजिटल इंडिया का दावा करने वाली सरकार में यह पूरी आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं है! इसके लिए अभ्यर्थियों को ख़ुद नियोजन इकाई पर जाकर अपना आवेदन जमा करवाना पड़ता है या वो डाक से अपना आवेदन भेज सकते हैं!

 

अब शिक्षा व्यवस्था के चौपट होने का दूसरा सबसे बड़ा कारण है, राज्य की शिक्षा व्यवस्था नियोजित शिक्षकों के द्वारा ही चलना है । आपको पता है कि नियोजित शिक्षकों की बहाली एवं उनकी गुणवत्ता हर छोटे से छोटे टेस्ट में फेल है। आप सभी जानते हैं कि शिक्षकों की कैसे बहाली हुई है। पुरानी गुणी और सक्षम शिक्षक सेवानिवृत हो रहे हैं तथा नियमित बहाली बंद है। राज्य में नियोजित शिक्षकों की संख्या पांच लाख है वहीं नियमित शिक्षक 60 हजार के आसपास बचे हुए हैं। सरकार कोर्ट में तो यह भी दलील दे रही है कि इस कैडर को चाहती है कि मुआवजा देकर हटा दिया जाए। इस दिशा में नीतीश सरकार ने योजना भी बना लिया है।

 

डॉ० संतोष ने न्यूज बिहार और भारत लाईव से बातचीत में चिंता व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा बिहार की गिरती शिक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल खड़े करते रहे हैं। डॉक्टर साहब ने बड़ी दुखी मन से कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि ऐसे क्षेत्र हैं जहां लोग सरकार के गलत नीतियों के कारण सबसे ज्यादा मजबूर है। जब इनके सब्र का बांध टूटेगा तो सब तहस नहस हो जाएगा। नीतीश- मोदी की सरकार को नैतिक आधार नहीं है सता में बने रहने का। पर वो सता के लिए जिस तरह बिहार के साथ छल करते आ रहे है उसका बदला लेने का वक्त आ गया है, हर तरफ आक्रोश है और यह आने वाले चुनाव में इन्हें भारी पड़ेगा।

Editor-in-Chief

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