राघोपुर संवाददाता;
रामनवमी के अवसर पर सिमराही नगर भगवामय हो गया जब सोमवार को हजारों रामभक्तों की टोली ने पारंपरिक वेशभूषा में जयघोष के साथ नगर में भव्य शोभा यात्रा निकाली। माथे पर भगवा पाग, ललाट पर चंदन, हाथों में भगवा ध्वज और पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र के साथ नगरवासी श्रद्धा और उल्लास में डूबे नजर आए। पूरा नगर जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा और माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।
रामनवमी महोत्सव के दूसरे दिन नगर पंचायत सिमराही द्वारा आयोजित यह शोभा यात्रा अपने भव्यता और जनभागीदारी को लेकर ऐतिहासिक रही। एनएच 27 किनारे राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी परिसर से मनीष भगत की अध्यक्षता में निकली इस विराट यात्रा में लगभग 25 हजार रामभक्तों ने भाग लिया। तीन किलोमीटर लंबी इस शोभायात्रा के कारण नगर का हर कोना भगवा रंग से सराबोर हो गया।
यात्रा का शुभारंभ दोपहर 1 बजे शंखनाद के साथ हुआ। यात्रा राधाकृष्ण ठाकुरबाड़ी से शुरू होकर एनएच 27, पुराना सिनेमा हॉल, गोलबाजार, जेपी चौक, करजाइन रोड, हॉस्पिटल रोड होते हुए पुनः जेपी चौक, पिपराही रोड, सिमराही पेट्रोल पंप, एनएच 106 होते हुए राघोपुर थाना, पोस्ट ऑफिस से होते हुए ठाकुरबाड़ी परिसर में समापन तक पहुंची।
शोभायात्रा के मार्ग में स्थानीय लोगों ने जगह-जगह ठंडा पानी, शरबत, लस्सी व प्रसाद की व्यवस्था की। श्रद्धालु जगह-जगह झूमते-गाते राम नाम में लीन दिखाई दिए। पारंपरिक हथियारों से लैस रामभक्तों ने विभिन्न स्थानों पर अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान खींचा।
विशेष आकर्षण का केंद्र रथों पर सजी जीवंत झांकियां रहीं। एक रथ पर श्रीराम, माता सीता और हनुमान के स्वरूप में बच्चे विराजमान थे, वहीं दूसरे पर महाकाल अघोरी ग्रुप का प्रदर्शन और तीसरे रथ पर माता काली के रूप ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढाक की धुनों पर थिरकते श्रद्धालु इस शोभायात्रा को भव्यता की पराकाष्ठा तक ले गए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि वर्षों से रामनवमी पर शोभायात्रा निकाली जाती है, लेकिन इस बार की यात्रा भीड़, भव्यता और झांकियों के कारण नगर और प्रखंड क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। राघोपुर बीडीओ ओमप्रकाश, राघोपुर थानाध्यक्ष नवीन कुमार, करजाइन थानाध्यक्ष लालजी प्रसाद, प्रतापगंज थानाध्यक्ष प्रमोद झा सहित दर्जनों पुलिसकर्मी यात्रा के हर रूट पर तैनात थे और अधिकारी स्वयं यात्रा के साथ चल रहे थे।
यह शोभायात्रा न केवल श्रद्धा का प्रतीक रही, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक गौरव का भी सजीव उदाहरण बनकर उभरी।
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