राघोपूर प्रखंड क्षेत्र स्थित रेफरल अस्पताल राघोपूर की स्थिति आज यह सोचने पर मजबूर करती है कि इसे रेफरल अस्पताल कहा जाए या केवल ‘रेफर… अस्पताल’। करोड़ों रुपये की लागत से हाल ही में निर्मित 50 बेड क्षमता वाला यह अस्पताल भवन, सुसज्जित ऑपरेशन थियेटर और डिलेवरी रूम होने के बावजूद आम लोगों के लिए लगभग बेकार साबित हो रहा है। कारण यहां इमरजेंसी सेवा, विशेषज्ञ चिकित्सक और आवश्यक संसाधनों का घोर अभाव है। यह अस्पताल मरीजों की संख्या के लिहाज से जिले के सदर अस्पताल के बाद दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल है। यहां प्रतिदिन ओपीडी में 350 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। लेकिन जरा सा भी मरीज गंभीर नजर आया नहीं कि उसे बिना समुचित इलाज के रेफर कर दिया जाता है। स्थिति यह है कि कई बार कई मरीज को बिना किसी उपचार के ही दूसरे अस्पतालों में भेज दिया जाता है।
नया अस्पताल भवन
— प्रसव के लिए आती हैं 40-50 महिलाएं, महिला चिकित्सक एक भी नहीं।
रेफरल अस्पताल राघोपूर में प्रतिदिन 40 से 50 गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए पहुंचती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यहां एक भी महिला चिकित्सक पदस्थापित नहीं है। मजबूरी में गर्भवती महिलाओं को पुरुष चिकित्सकों या केवल जीएनएम और एएनएम के सहारे प्रसव कराना पड़ता है। जैसे ही किसी महिला की स्थिति थोड़ी भी गंभीर होती है, उसे तुरंत रेफर कर दिया जाता है। सबसे गंभीर और चिंताजनक आरोप यह है कि कई मामलों में अस्पताल में कार्यरत कुछ नर्सों द्वारा गर्भवती महिलाओं को स्थानीय निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। बताया जाता है कि यह काम निजी अस्पताल के दलालों के माध्यम से किया जाता है, जिसके बदले उन्हें निजी अस्पतालों से मोटा कमीशन भी मिल जाता है। इस वजह से क्षेत्र में निजी अस्पतालों का अवैध गोरखधंधा भी तेजी से फल-फूल रहा है।
— विशेषज्ञ चिकित्सकों के सभी पद खाली।
रेफरल अस्पताल राघोपूर में चिकित्सकों के कुल 12 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 8 सामान्य चिकित्सक और 4 विशेषज्ञ शामिल हैं। लेकिन विशेषज्ञ के एक भी पद पर तैनाती नहीं है।
— शल्य चिकित्सक: 1 पद स्वीकृत, पदस्थापित शून्य
— एनेस्थीसिया विशेषज्ञ: 1 पद स्वीकृत, पदस्थापित शून्य
— महिला चिकित्सक: 1 पद स्वीकृत, पदस्थापित शून्य
— डेंटिस्ट: 1 पद स्वीकृत, पदस्थापित शून्य
— सामान्य चिकित्सकों के 8 पदों के विरुद्ध केवल 6 चिकित्सक कार्यरत हैं।
– वहीं नर्सिंग स्टाफ की स्थिति भी दयनीय है।
— जीएनएम: 8 पद स्वीकृत, केवल 3 पदस्थापित
— एएनएम: 12 पद स्वीकृत, केवल 6 पदस्थापित
— ओटी असिस्टेंट: 2 पद स्वीकृत, 1 पदस्थापित, वह भी अन्यत्र प्रतिनियुक्त
इन कमियों के कारण सुसज्जित ऑपरेशन थियेटर होने के बावजूद ऑपरेशन की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। अस्पताल से प्रतिदिन सड़क दुर्घटना, मारपीट और अन्य गंभीर मामलों के करीब 20 से 25 मरीजों को रेफर कर दिया जाता है। वहीं हर दिन 2-3 गर्भवती प्रसव पीड़ित महिलाओं को भी बेहतर इलाज के नाम पर बाहर भेज दिया जाता है।
कहते है स्थानीय
स्थानीय लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण जिले का यह महत्वपूर्ण अस्पताल बदहाल स्थिति में है। किसी दुर्घटना में हाथ-पैर की हड्डी टूटने जैसी सामान्य समस्या का भी यहां इलाज नहीं हो पाता। मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है, जहां उन्हें मोटी रकम खर्च करनी होती है। सड़क दुर्घटना के घायलों को तो बिना देर किए सीधे रेफर कर दिया जाता है। कुल मिलाकर, राघोपूर का रेफरल अस्पताल आज संसाधनों, चिकित्सकों और व्यवस्था की कमी के कारण अपनी मूल भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल नजर आ रहा है। यदि शीघ्र सुधार नहीं हुआ, तो यह अस्पताल केवल ‘रेफर करने का केंद्र’ बनकर ही रह जाएगा
क्या कहते है जिम्मेदार-
इस संबंध में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीपनारायण राम ने बताया कि अस्पताल में सर्जन सहित एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक पदस्थापित नहीं है। गंभीर मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना मजबूरी है। उन्होंने बताया कि हर महीने परिवार नियोजन ऑपरेशन कैंप लगाया जाता है, लेकिन एनेस्थीसिया चिकित्सक नहीं रहने से उसमें भी परेशानी होती है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल में संसाधनों की भारी कमी है। करोड़ों की लागत से बना 50 बेड का चदरा का अस्पताल भवन उचित मेंटेनेंस के अभाव में कुछ ही महीनों में जर्जर हो गया है। इस समस्या को लेकर बार-बार पत्राचार किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। वर्तमान में रेफरल अस्पताल एपीएचसी सिमराही के जर्जर भवन में संचालित हो रहा है, जिससे मरीजों और स्टाफ दोनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
सिविल सर्जन सुपौल ललन ठाकुर से पूछने पर उन्होंने भी माना कि रेफरल अस्पताल में विशेसज्ञ चिकित्सक की कमी है। बताया कि विशेषज्ञ चिकित्सा का सदर अस्पताल सुपौल में भी घोर कमी है एक भी महिला चिकित्सक नहीं है। बताया कि विभाग से मांगा जा रहा है प्रयास करते हैं, मार्च तक में हो जाना चाहिए।