सुपौल : संसाधनों की कमी भी नहीं रोक सकी हौसले की उड़ान, साइकिल मिस्त्री के बेटे राजदीप ने 97% अंक के साथ बिहार में छठा स्थान किया हासिल

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राघोपुर (सुपौल)


छात्र राजदीप

राघोपुर प्रखंड के रामबिशनपुर पंचायत अंतर्गत हुसैनावाद गांव से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी सामने आई है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा रविवार को जारी मैट्रिक परीक्षा परिणाम में यहां के छात्र राजदीप कुमार ने 485 अंक (97 प्रतिशत) हासिल कर पूरे बिहार में छठा स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया है।
संघर्ष भरी पृष्ठभूमि से सफलता तक का सफर
राजदीप, रेणु देवी और बीरेंद्र मंडल के पुत्र हैं। उनके पिता गांव में साइकिल मरम्मत की छोटी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित आय और संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे की पढ़ाई में कभी बाधा नहीं आने दी। चार भाइयों में तीसरे स्थान पर राजदीप ने अपने परिश्रम और लगन से यह मुकाम हासिल किया है।
पिता बीरेंद्र मंडल बताते हैं कि राजदीप बचपन से ही मेधावी छात्र रहा है। उसकी प्रारंभिक शिक्षा उत्क्रमित मध्य विद्यालय, हुसैनावाद में हुई, जिसके बाद उसने खूबलाल मध्य विद्यालय, रामबिशनपुर में नामांकन लिया और वहीं से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की।
अभावों के बीच भी नहीं टूटा आत्मविश्वास
राजदीप ने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, अनुशासन और परिवार के सहयोग को दिया। उन्होंने बताया कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई सुचारू रूप से नहीं हो पाती थी। एक ही शिक्षक कई विषय पढ़ाते थे, जिससे विषयों की गहराई से तैयारी करना चुनौतीपूर्ण था।
इन परिस्थितियों में उन्होंने गांव में संचालित कोचिंग का सहारा लिया और नियमित रूप से स्वाध्याय करते हुए अपनी तैयारी को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि “अगर मन में दृढ़ संकल्प हो, तो संसाधनों की कमी भी रास्ता नहीं रोक सकती।”
टॉपर लिस्ट में आने का पहले ही हो गया था अंदाजा
राजदीप ने बताया कि 26 मार्च को उन्हें पटना स्थित बिहार बोर्ड कार्यालय में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। इंटरव्यू में पूछे गए प्रश्नों का उन्होंने आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिया। उसी समय उन्हें आभास हो गया था कि वे टॉपर सूची में जगह बना सकते हैं।
इंजीनियर बन देश सेवा का सपना
राजदीप का लक्ष्य आगे चलकर इंजीनियर बनना है। वे तकनीकी क्षेत्र में योगदान देकर देश के विकास में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
विद्यालय की चुनौतियां भी आईं सामने
विद्यालय के प्रधानाचार्य महानंद कुंदन ने बताया कि खूबलाल मध्य विद्यालय को उत्क्रमित उच्च विद्यालय का दर्जा तो मिल गया है, लेकिन संसाधनों की अब भी भारी कमी है। मैट्रिक स्तर के छात्रों के लिए पर्याप्त कक्ष नहीं हैं और मध्य विद्यालय के कमरों में ही पढ़ाई संचालित की जाती है। विद्यालय में प्रयोगशाला का अभाव है और कई विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, यहां तक कि वर्तमान में विज्ञान शिक्षक भी नहीं है।
उन्होंने कहा कि यदि विद्यालय को आवश्यक संसाधन और शिक्षक मिल जाएं, तो यहां के छात्र और बेहतर परिणाम ला सकते हैं।
प्रेरणा बना राजदीप, चमका गांव का नाम
राजदीप कुमार की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के आगे टिक नहीं सकतीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की है, वह न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। उनकी मेहनत और सफलता आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।

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News Bihar Live
Author: News Bihar Live

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