राघोपुर (सुपौल)।
राघोपुर थाना परिसर में मंगलवार की शाम करीब साढ़े पांच बजे उस समय तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई, जब एक बरामद नाबालिग लड़की के परिजनों और पुलिसकर्मियों के बीच विवाद बढ़ते-बढ़ते हाथापाई में बदल गया। घटना के बाद पुलिस पर हिरासत में ले जाकर पिटाई करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं, हालांकि पुलिस प्रशासन ने इन आरोपों से साफ इनकार किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नदी थाना क्षेत्र के एक गांव की नाबालिग लड़की कुछ दिनों पूर्व राघोपुर थाना क्षेत्र के एक गांव स्थित अपने रिश्तेदार के घर से लापता हो गई थी। इस संबंध में राघोपुर थाना कांड संख्या 363/25 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसमें एक युवक को नामजद आरोपी बनाया गया था।
मामले के अनुसंधानकर्ता एएसआई ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही पुलिस टीम लगातार लड़की की बरामदगी के प्रयास में जुटी थी। इसी क्रम में मंगलवार को बीरपुर से लड़की को बरामद कर लिया गया। बरामदगी के बाद पुलिस उसे मेडिकल जांच के लिए सुपौल सदर अस्पताल लेकर गई।
अस्पताल में सूचना मिलने पर लड़की के परिजन भी बड़ी संख्या में पहुंच गए और उससे मिलने की मांग करने लगे। पुलिस के अनुसार मेडिकल प्रक्रिया पूरी होने तक मुलाकात संभव नहीं होने के कारण परिजन आक्रोशित हो गए और कथित रूप से गाली-गलौज करने लगे। इस दौरान स्थिति बिगड़ने पर धक्का-मुक्की की नौबत आ गई।
पुलिस का कहना है कि किसी तरह लड़की को सुरक्षित वाहन में बैठाकर थाना लाया गया, लेकिन विवाद वहीं समाप्त नहीं हुआ। आरोप है कि थाना पहुंचने के बाद भी दोनों पक्षों के बीच कहासुनी जारी रही, जो बाद में झड़प में बदल गई। स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए अन्य सिपाहियों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
वहीं, पीड़िता के एक परिजन ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि थाने में उन्हें और उनके एक रिश्तेदार को एक कमरे में ले जाकर बेरहमी से पीटा गया। उनका आरोप है कि मारपीट में वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। बाद में उन्होंने राघोपुर रेफरल अस्पताल में इलाज कराया।
इधर, राघोपुर थानाध्यक्ष अमित कुमार राय ने घटना को लेकर पिटाई के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि “इस तरह की कोई घटना नहीं हुई है।” उन्होंने मामले को सामान्य बताते हुए कहा कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
घटना के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। दोनों पक्षों के अलग-अलग बयान सामने आने से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है, ताकि सच्चाई स्पष्ट हो सके।
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