सुपौल : बायो मेडिकल वेस्ट खुले में फेंकने पर सिमराही के ओम सत्या नर्सिंग होम पर छापेमारी

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लाइसेंस की अवधि समाप्त, मौके पर चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ नहीं मिले; एसडीएम ने अस्पताल बंद करने का दिया निर्देश

राघोपुर (सुपौल)

सुपौल जिले के राघोपुर थाना के समीप एनएच-106 किनारे संचालित ओम सत्या नर्सिंग होम में गुरुवार को प्रशासनिक टीम ने छापेमारी कर जांच की। नगर पंचायत के कूड़ेदान में प्रसूता का प्लेसेंटा और अन्य बायो मेडिकल वेस्ट मिलने की शिकायत पर डीएम के निर्देश पर एसडीएम वीरपुर विनय कुमार के नेतृत्व में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीपनारायण राम, नगर पंचायत सिमराही की कार्यपालक पदाधिकारी वीणा वैशाली और थानाध्यक्ष अमित कुमार राय मौके पर पहुंचे।

जांच के दौरान अस्पताल में एक ऑपरेशन के बाद भर्ती महिला मरीज मिली, जबकि अस्पताल में एक भी चिकित्सक या नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी ने अस्पताल के लाइसेंस की जांच की तो उसकी वैधता अवधि समाप्त पाई गई। अस्पताल प्रबंधन द्वारा लाइसेंस नवीनीकरण के लिए विभागीय कार्यालय में पत्राचार किए जाने की बात सामने आई, लेकिन वर्तमान में लाइसेंस वैध नहीं पाया गया।

बताया गया कि बुधवार रात अस्पताल में एक महिला का ऑपरेशन कर प्रसव कराया गया था। इसके बाद निकला प्लेसेंटा और अन्य बायो मेडिकल कचरा नगर पंचायत के कूड़ेदान में फेंक दिया गया। गुरुवार सुबह सफाईकर्मी कचरा उठाने पहुंचा तो उसे प्लेसेंटा समेत अन्य मेडिकल वेस्ट मिला। इसकी सूचना नगर पंचायत की कार्यपालक पदाधिकारी को दी गई। सफाईकर्मियों और स्थानीय लोगों ने मामले की तस्वीरें भी वरीय अधिकारियों को भेजीं, जिसके बाद जांच की कार्रवाई की गई।

जांच के दौरान अस्पताल संचालक भाग्य श्री (बी कुमारी) समेत कर्मियों के मौके से फरार हो जाने की बात भी सामने आई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में प्रसव के साथ-साथ महिलाओं का अबॉर्शन और डीएनसी भी कराया जाता है तथा मेडिकल वेस्ट और मृत नवजात को कथित तौर पर खुले में फेंकने या मिट्टी में दबाने की घटनाएं होती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की प्रशासनिक स्तर पर पुष्टि होना अभी बाकी है।

सफाईकर्मियों ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन को कई बार खुले कूड़ेदान में मेडिकल वेस्ट नहीं डालने की हिदायत दी गई थी, इसके बावजूद ऐसा किया जाता रहा। एक सफाईकर्मी ने बताया कि पूर्व में बायो मेडिकल वेस्ट में पड़ी सुई हाथ में चुभ जाने के बाद उसे कई दिनों तक इलाज कराना पड़ा था।

चिकित्सक के प्रमाणपत्र पर चल रहा था अस्पताल

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीपनारायण राम ने बताया कि अस्पताल का संचालन जांच में अवैध पाया गया। अस्पताल में ऑपरेशन के बाद एक मरीज भर्ती मिली, लेकिन कोई चिकित्सक या नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था। उन्होंने बताया कि अस्पताल को पूर्व में लाइसेंस मिला था, जिसकी अवधि समाप्त हो चुकी है। जिस चिकित्सक के प्रमाणपत्र के आधार पर अस्पताल का लाइसेंस लिया गया था, वह चिकित्सक भी अस्पताल में कभी दिखाई नहीं देने की बात सामने आई है।

एसडीएम विनय कुमार ने बताया कि घटना कि जानकारी मिलने के बाद अस्पताल का निरिक्षण किया गया जहां अनियमितताएं सामने आने पर प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को उचित कार्यवाई का आदेश दिया गया है।

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News Bihar Live
Author: News Bihar Live

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