सुपौल : अच्छी सड़क पर 26 लाख से पीसीसी ढलाई का आरोप, घटिया सीमेंट को लेकर ग्रामीणों का हंगामा; विभाग ने निर्माण कार्य रोकने की कही बात

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राघोपुर (सुपौल)

ग्रामीण कार्य विभाग, बीरपुर इन दिनों सड़क निर्माण कार्यों को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है। कहीं मिट्टी के ऊपर ही कालीकरण किए जाने के आरोप लग रहे हैं तो कहीं पहले से बेहतर और समतल स्थिति में मौजूद सड़कों पर नए निर्माण कार्य कराए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ताजा मामला राघोपुर प्रखंड क्षेत्र की हरिपुर पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या-3 स्थित राधानगर गांव का है, जहां करीब 26 लाख रुपये की लागत से पीसीसी ढलाई कार्य कराए जाने के दौरान मंगलवार को ग्रामीणों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया।

ग्रामीणों का आरोप है कि जिस सड़क पर पीसीसी ढलाई कराई जा रही थी, वह पहले से ही समतल और चलने योग्य स्थिति में थी। इसके बावजूद विभाग द्वारा उक्त सड़क पर लाखों रुपये खर्च कर निर्माण कार्य कराया जा रहा था। ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य विभाग के जेई मणिकांत कुमार की मौजूदगी में संवेदक ओम साईं इंजिकोन्स द्वारा कराया जा रहा था।

घटिया सीमेंट इस्तेमाल करने का आरोप

निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने पीसीसी ढलाई में इस्तेमाल किए जा रहे सीमेंट की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए। ग्रामीणों का आरोप था कि कई सीमेंट बैगों में सीमेंट बड़े-बड़े पत्थरनुमा ढेलों के रूप में जमा हुआ था और इसी सामग्री का उपयोग सड़क निर्माण में किया जा रहा था।
ग्रामीणों ने मौके पर सीमेंट के बोरे से निकले जमे हुए ढेलों को दिखाते हुए निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की। लोगों ने योजना का स्टीमेट एवं अन्य तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने की भी मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर मौजूद जिम्मेदार लोगों द्वारा स्टीमेट उपलब्ध नहीं कराया गया, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ गई।
ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि सीमेंट के बोरे पर अंकित क्यूआर कोड स्कैन नहीं हो रहा था, जिसके बाद लोगों ने सीमेंट की प्रमाणिकता और गुणवत्ता पर सवाल खड़े करते हुए पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

स्टीमेट मांगने पर विवाद का आरोप

मौके पर मौजूद हरिपुर पंचायत की मुखिया नोशी परवीन के पति मो. फैयाज आलम ने बताया कि स्थानीय लोगों की सूचना पर वह निर्माण स्थल पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के साथ मिलकर जेई एवं संवेदक के कर्मियों से योजना का स्टीमेट मांगा गया, लेकिन उसे उपलब्ध नहीं कराया गया।

उनका आरोप है कि संवेदक के मुंशी के मोबाइल से विभाग के एक पदाधिकारी से बातचीत कराई गई, जहां कथित तौर पर स्टीमेट नहीं दिखाने की बात कही गई। उन्होंने बातचीत के दौरान उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किए जाने का भी आरोप लगाया।

गुणवत्ता में गड़बड़ी मिलने पर सीमेंट हटाने की बात
मामले में ग्रामीण कार्य विभाग के जेई मणिकांत कुमार ने कहा कि यदि जांच के दौरान सीमेंट की गुणवत्ता में किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो संबंधित सीमेंट को हटाकर मानक के अनुरूप सामग्री से निर्माण कार्य कराया जाएगा।

अच्छी सड़क को ड्रॉप सूची में डालने का निर्देश

वहीं ग्रामीण कार्य विभाग के सहायक अभियंता अंजन कुमार ने बताया कि विभागीय निर्देश के अनुसार जिन सड़कों की स्थिति पहले से अच्छी है, उन्हें निर्माण सूची से हटाकर ड्रॉप सूची में डालने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि राधानगर की उक्त सड़क को भी ड्रॉप सूची में शामिल किया गया है और संवेदक को इसकी सूचना देकर निर्माण कार्य रोकने की कार्रवाई की जा रही है। सीमेंट की गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि कभी-कभी नमी अथवा अन्य तकनीकी कारणों से बड़ी संख्या में रखे सीमेंट बैगों में एक-दो प्रतिशत बैग जम सकते हैं। हालांकि मामले की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

वहीं ग्रामीण कार्य विभाग, बीरपुर के कार्यपालक अभियंता नीरज कुमार ने बताया कि विभाग से नया गाइडलाइन प्राप्त हुआ है, जिसके तहत अच्छी स्थिति वाली सड़कों को ड्रॉप सूची में डालकर निर्माण कार्य रोकने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी संवेदकों को इसकी जानकारी दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राधानगर सड़क निर्माण मामले की जांच कराई जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से कराई जाए और यदि निर्माण कार्य में अनियमितता या घटिया सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

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News Bihar Live
Author: News Bihar Live

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