राघोपुर संवाददाता;
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बीच दस्तावेजों को लेकर सुपौल के राघोपुर समेत आसपास के हजारों लोगों में असमंजस और नाराजगी का माहौल है। सबसे ज्यादा परेशानी उन महिलाओं को हो रही है, जो नेपाल से शादी कर भारतीय परिवारों में आई हैं।
चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और सुधार के लिए 11 तरह के दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज अनिवार्य किया है। इनमें स्थायी निवास प्रमाणपत्र और जाति प्रमाणपत्र भी शामिल हैं। जिन परिवारों के नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे, वे अब स्थायी निवास प्रमाणपत्र बनवाकर नाम कटने से बचाने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन राघोपुर अंचल कार्यालय से फिलहाल अधिकतर लोगों को केवल अस्थायी निवास प्रमाणपत्र ही दिया जा रहा है, जिससे लोगों में भारी असंतोष है।
सूत्रों के मुताबिक, राघोपुर अंचल में पहले प्रतिदिन औसतन 100 निवास प्रमाणपत्र के आवेदन आते थे। लेकिन मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान शुरू होने के बाद अब यह आंकड़ा पांच गुना तक बढ़ गया है।
इस संबंध में राघोपुर की सीओ रश्मि प्रिया ने बताया कि जिन आवेदकों द्वारा माता-पिता या पूर्वजों के दस्तावेज दिए जा रहे हैं, उन्हें स्थायी निवास प्रमाणपत्र जारी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले जमीन की रसीद और मतदाता पहचान पत्र पर निवास प्रमाणपत्र जारी हो जाता था। लेकिन नेपाल के कई नागरिकों द्वारा गलत तरीके से भारतीय दस्तावेज बनवाने की शिकायतें मिलीं हैं। इसी वजह से अब जांच सख्त कर दी गई है।
सीओ रश्मि प्रिया ने कहा कि नेपाल से आई महिलाओं और उनके परिवारों की सही पहचान करना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि स्थायी निवास प्रमाणपत्र के लिए आवेदन करते समय माता-पिता या पूर्वजों का दस्तावेज जरूर संलग्न करें ताकि प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
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