सुपौल: राघोपुर थाने से बिके प्रतिबंधित मछली कांड में नया खुलासा, सरहोचिया का ढोंगी यूट्यूबर सतीश यादव बना सौदेबाज दलाल

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राघोपुर संवाददाता:

राघोपुर थाना क्षेत्र में जब्त की गई प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली की थाना से अवैध रूप से बिक्री का मामला अब और गहराता जा रहा है। इस पूरे मामले में सरहोचिया गाँव का तथाकथित यूट्यूबर सतीश यादव (पिता परशुराम यादव) की संदिग्ध भूमिका सामने आई है।

पीड़ित पक्ष ने पुलिस के वरीय अधिकारी को दिए आवेदसन में आरोप लगाया है कि राघोपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष नवीन कुमार और अनुमंडल मत्स्य पदाधिकारी की मिलीभगत से जब्त 25 क्विंटल थाई मांगुर मछली को बेचने का काला खेल रचा गया। इस खेल का सबसे घटिया और दलाल चेहरा बनकर उभरा सतीश यादव, जो खुद को पत्रकार कहकर लोगों को गुमराह करता है।

आरोप है कि 15 सितंबर की रात यह कथित पत्रकार थाना स्टाफ के एक जवान के साथ सिमराही बाजार स्थित संतोष साह के “सुमित फिश सेंटर” पहुंचा और थानाध्यक्ष की ओर से जब्त मछली खरीदने का प्रस्ताव रखा। पीड़ित व्यवसाई के द्वारा पहले इनकार करने पर पुलिस जवान ने तत्कालीन थानाध्यक्ष नवीन कुमार से मोबाइल पर बातचीत कराई और अगले दिन थाना आकर मछली देखने का दबाव बनाया।

अगले दिन थाना परिसर में मछली देखने और सौदेबाजी का सिलसिला शुरू हुआ। आरोप है की लगभग 16–17 क्विंटल जिंदा मछली बची थी, जिसे लेकर सतीश यादव हर पल थानाध्यक्ष और पीड़ित संतोष साह के बीच दलाली करता रहा। अंततः 70 हजार रुपये में सौदा तय हुआ और यह रकम सीधे थानाध्यक्ष नवीन कुमार ने पीड़ित की आढ़त पर आकर वसूली।

उसके बाद चार गाड़ियों में मछली थाना से उठाकर आढ़त भेज दी गई। लेकिन जैसे ही खबर लीक होने की भनक लगी, थानाध्यक्ष ने अचानक पैंतरा बदल दिया और बची हुई मछली को सरहोचिया के पास गाड़ देने का फरमान जारी कर दिया। इसी बीच आधी रात को पुलिस दल आढ़त पहुंचकर न केवल जब्त मछली ले गई, बल्कि वहां पहले से रखी करीब डेढ़ लाख रुपये मूल्य की मछली भी उठा ले गई।

इसके बाद पुलिस ने अपने आपको कार्यवाही से बचाने के लिए पीड़ित संतोष साह के खिलाफ ही झूठा चोरी का मुकदमा थाना में दर्ज कर दिया। पीड़ित परिवार का कहना है कि पूरा षड्यंत्र थानाध्यक्ष और इस यूट्यूबर दलाल सतीश यादव की मिलीभगत से रचा गया, ताकि असलियत सामने न आ सके।

स्थानीय लोग भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर थाने में जब्त मछली की बिक्री यूट्यूबर की मौजूदगी में क्यों और कैसे की गई? अब यह साफ हो चुका है कि पुलिस और इस दलालनुमा यूट्यूबर की साठगांठ से पूरा मामला दबाने की कोशिश की गई।

फिलहाल, पीड़ित पक्ष ने एसडीपीओ वीरपुर और सर्किल इंस्पेक्टर बीरपुर से निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि थाना में लगे सीसीटीवी फुटेज पूरे मामले का सच उजागर कर देगा और थानाध्यक्ष के साथ-साथ इस ढोंगी यूट्यूबर का असली चेहरा सामने आ जाएगा।

बरें और भी हैं………

News Bihar Live
Author: News Bihar Live

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